तत्प्राज्ञेन विनीतेन ज्ञानविज्ञानवेदिना ।
आयुष्कामेन वप्तव्यं न जातु परयोषिति ।।
इस कारण से विद्वान्, विनीत ज्ञान (वेद) तथा विज्ञान (वेदाङ्गादि सब शास्त्र) का ज्ञाता और आयुष्य चाहनेवाले पुरुष को पर-स्त्री में बीजवचन (सम्भोग द्वारा वीर्यपात) कभी नहीं करना चाहिये।
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