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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 4
कालेऽदाता पिता वाच्यो वाच्यश्चानुपयन्पतिः । मृते भर्तरि पुत्रस्तु वाच्यो मातुररक्षिता ।।
समय पर (ऋतुमती होने के पूर्व) नहीं देने (विवाह नहीं करने) वाला पिता निन्दनीय है, समय पर (ऋतुमती होने पर शुद्धि के बाद) सम्भोग नहीं करने वाला पति निन्दनीय होता है और पति के मर जाने पर माता की रक्षा नहीं करने वाला पुत्र निन्दनीय होता है।
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