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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 38
भूमावप्येककेदारे कालोप्तानि कृषीवलैः । नानारूपाणि जायन्ते वीजानीह स्वभावतः
भूमि में किसानों के द्वारा एक खेत में भी समय-समय पर बोये गये (विभिन्न जातीय) बीज अपने-अपने स्वभाव के अनुसार भिन्न-भिन्न रूपवाले उत्पन्न होते हैं (भूमिका एक रूप होने पर भी बीजों का एक रूप नहीं होता, अत एव बीज को ही प्रधान मानना चाहिये।
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