इयं भूमिर्हि भूतानां शाश्वती योनिरुच्यते ।
न च योनिगुणान्कांश्रिद्बीजं पुष्यति पुष्टिषु ।।
यह भूमि भूत (क द्वारा आरब्ध वृक्ष, लता, गुल्म आदि) की नित्य (अनादि कालगत) क्षेत्ररूप कारण कही गयी है, किन्तु कोई बीज योनि (क्षेत्र अर्थात् खेत) के किन्ही गुणों को अपने अङ्कुर आदि में धारण नहीं करता; (अतएव योनि (क्षेत्र अर्थात् खेत) के गुण का बीज के द्वारा अनुवर्तन नहीं होने से क्षेत्र की प्रधानता नहीं होती है)।
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