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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 36
यादृशं तृप्यते बीजं क्षेत्रे कालोपपादिते । तादृग्रोहति तत्तस्मिन्बीजं स्वैर्व्यञ्जितं गुणैः ।।
समय पर जोते तथा सींचे गये खेत में जैसा (जिस जातिवाला) बीज बोया जाता है, अपने गुणों से वह बीज उस खेत में वैसा (अपनी जाति के समान) ही उत्पन्न होता है।
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