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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 34
विशिष्टं कुत्रचिद्बीजं स्रीयोनिस्त्वेव कुत्रचित्‌ । उभयं तु समं यत्र सा प्रसूतिः प्रशस्यते ।।
कहीं पर बीज प्रधान है और कहीं पर क्षेत्र प्रधान है जहाँ पर बीज तथा क्षेत्र (पुरुष तथा स्त्री-दोनों समान हैं अर्थात्‌ उन दोनों के मध्य में तीसरा कोई नहीं है। वह सन्तान श्रेष्ठ मानी जाती है।
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