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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 334
विप्राणां वेदविदुषां गृहस्थानां यशस्विनाम्‌ । शुश्रूषैव तु शूद्रस्य धमो नैश्रेयसः परम्‌ ।।
वेदज्ञाता ब्राह्मणों तथा यशस्वो सदगृहस्थों की सेवा करना ही शूद्र का कल्याणकारक उत्तम धर्म है।
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