सारासारं च भाण्डानां देशानां च गुणागुणान् ।
लाभालाभं च पण्यानां पशूनां परिवर्धनम् ।।
वस्तुओं की सारता (अच्छापन) तथा निःसारता (ख़राबी) देशों के गुण तथा दोष, सौदो (बेचे जाने वाली वस्तुओं) के लाभ तथा हानि, पशुओं को बढ़ाने के उपाय (किस समय में कैसा कार्य करने से पशुओं की उन्नति होगी इत्यादि उपाय)।
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