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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 325
एषोऽखिलः कर्मविधिरुक्तो राज्ञः सनातन: । इमं कर्मविधिं विद्यात्क्रमशो वैश्यशूद्रयोः ।।
(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि मैंने) राजा के इस समस्त सनातन कर्मविधान को कहा, अब क्रमश: वैश्य तथा शूद्र के वक्ष्यमाण कर्मविधान को जानना चाहिये।
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