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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 322
नाब्रह्म क्षत्रमृध्नोति नाक्षत्रं ब्रह्म वर्धते । ब्रह्म क्षत्रं संपृक्तमिह चामुत्र वर्धते ।।
ब्राह्मण के बिना क्षत्रिय तथा क्षत्रिय के बिना ब्राह्मण समृद्धि को नहीं पा सकते, (किन्तु) मिले हुए ब्राह्मण तथा क्षत्रिय इस लोक में तथा परलोक में (धर्मार्थकाममोक्ष रूप चतुर्विध पुरुषार्थ को पाने से) समृद्धि को पाते हैं।
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