ब्राह्मण के बिना क्षत्रिय तथा क्षत्रिय के बिना ब्राह्मण समृद्धि को नहीं पा सकते, (किन्तु) मिले हुए ब्राह्मण तथा क्षत्रिय इस लोक में तथा परलोक में (धर्मार्थकाममोक्ष रूप चतुर्विध पुरुषार्थ को पाने से) समृद्धि को पाते हैं।
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