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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 32
भर्तुः पुत्रं विजानन्ति श्रुतिद्वैधं तु कर्तरि । आहुरुत्पादकं केचिदपरे क्षेत्रिणं विदुः ।।
पुत्र पति (भर्ता) का होता है (ऐसा मुनि लोग) मानते हैं, पति के विषय में दो प्रकार की श्रुति है (उनमें से पहली श्रुति यह है कि) कुछ मुनि पुत्रोत्पादक अविवाहित पति को भी उस पुत्र से पुत्री (पुत्रवाला) मानते हैं (तथा दूसरी श्रुति यह है कि) अन्य (मुनि लोग) विवाहकर्त्ता (परन्तु स्वयं पुत्रोत्पादन नहीं करनेवाले पति) को (अन्य पुरुषोत्पादित) पुत्र से पुत्री (पुत्रवाला) मानते हैं ।
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