यज्ञ को करने-कराने वाले जिन ब्राह्मणों का आश्रयकर (पृथ्वी आदि) लोक तथा (इन्द्र आदि) देव स्थिति पाते हैं और ब्रह्म (वेद) ही जिनका धन है, उन ब्राह्मणों को जीने का इच्छुक कौन व्यक्ति मारेगा? अर्थात् कोई नहीं।
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