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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 310
प्रतापयुक्तस्तेजस्वी नित्यं स्यात्पापकर्मसु । दुष्टसामन्तहिंस्रश्व तदाग्नेयं व्रतं स्मृतम्‌ ।।
राजा पापियों (अपराधियों) को दण्डित करने में सर्वदा प्रचण्ड तथा असह्य तेजवाला होवे तथा दुष्ट (प्रतिकूल व्यवहार करनेवाले) मन्त्री आदि का वध करनेवाला होवे, यह राजा का 'आग्नेयत्रत' है।
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