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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 31
पुत्रं प्रत्युदितं सद्भिः पूर्वजैश्च महर्षिभिः । विश्वजन्यमिमं पुण्यमुपन्यासं निबोधत ।।
(महर्षियों से भृगुजी कहते हैं कि) श्रेष्ठ (मनु आदि) तथा प्राचीन महर्षियों ने पुत्र के विषय में सर्वहितकारी एवं पवित्र जो विचार कहा है, उसे (आप लोग) सुनें!
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