जिस प्रकार परिपूर्ण चन्द्रमा को देखकर मनुष्य हर्षित होते हैं उसी प्रकार अमात्य आदि प्रकृति (९।२९४) तथा समस्त प्रजा) जिस राजा को देखकर हर्षित हों, वह राजा चान्द्रव्रतिक (“चन्द्रव्रत' वाला) है।
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