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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 307
यथा यमः प्रियद्वेष्यौ प्राप्ते काले नियच्छति । तथा राज्ञा नियन्तव्याः प्रजास्तद्भि यमब्रतम्‌ ।।
जिस प्रकार यमराज समय आने पर प्रिय और अप्रिय सब को मारता है, उसी प्रकार राजा समय आने (अपराध करने) पर प्रिय-अप्रिय सब प्रजाओं को दण्डित करे; यह राजा का “यमव्रत” है।
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