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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 305
अष्टौ मासान्यथादित्यस्तोयं हरति रश्मिभिः । तथा हरेत्करं राष्ट्रान्नित्यमर्कब्रतं हि तत्‌ ।।
जिस प्रकार सूर्य अगहन आदि आठ मासों में किरणों के द्वारा जल को हरण करता (लेता = सुखाता) है, उसी प्रकार राजा राज्य से कर को लेवे यह राजा का 'सू्यत्रत' है।
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