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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 303
इन्द्रस्यार्कस्य वायोश्च यमस्य वरुणस्य च । चन्द्रस्याग्नेः पृथिव्याश्च तेजोवृत्तं नृपश्चरेत्‌ ।।
राजा को इन्द्र, सूर्य, वायु, यम, वरुण, चन्द्रमा, अग्नि और पृथिवी के तेज का आचरण करना चाहिये। (राज्य के कण्टकभूत चोर आदि को वश में करने के लिए प्रताप = दण्ड तथा स्नेह - दोनों का ही समयानुसार कार्य में प्रयोग करना चाहिए)।
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