कृतं त्रेतायुगं चैव द्वापरं कलिरेव च।
राज्ञो वृत्तानि सर्वाणि राजा हि युगमुच्यते ।।
सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग तथा कलियुग, ये चारों युग राजा के ही चेष्टाविशेष (आचार, व्यवहार) से होते हैं, अतएव राजा ही 'युग' कहलाता है (इस कारण युग के अनुसार कार्य फल देते हैं ऐसा विचारकर राजा को कार्यारम्भ से उदासीन कभी नहीं होना चाहिये)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।