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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 3
पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने । रक्षन्ति स्थविरे पुत्रा न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति । ।
स्त्री की रक्षा बचपन में पिता करता है, युवावस्था में पति करता है, वृद्धावस्था में पुत्र करते हैं; स्त्री स्वतन्त्र रहने के योग्य नहीं है। (पति-पुत्रहीन स्त्री की रक्षा युवावस्था में पिता आदि स्वजन भी कर सकते हैं, अतएव युवावस्था में पति का रक्षा करना प्रायिक समझना चाहिये)।
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