पीडनानि च सर्वाणि व्यसनानि तथैव च ।
आरभेत तत: कार्य संचिन्त्य गुरुलाघवम् ।।
(राजा अपने तथा शत्रु के राज्य में काम तथा क्रोध से किये गये मारण ताइन आदि) पीड़न और व्यसनों की कमी-वेशी को मालूमकर और विचारकर इसके बाद कार्य (सन्धि-विग्रह आदि) को आरम्भ करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।