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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 299
पीडनानि च सर्वाणि व्यसनानि तथैव च । आरभेत तत: कार्य संचिन्त्य गुरुलाघवम्‌ ।।
(राजा अपने तथा शत्रु के राज्य में काम तथा क्रोध से किये गये मारण ताइन आदि) पीड़न और व्यसनों की कमी-वेशी को मालूमकर और विचारकर इसके बाद कार्य (सन्धि-विग्रह आदि) को आरम्भ करे।
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