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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 297
तेषु तेषु तु कृत्येषु तत्तदङ्गं विशिष्यते । येन यत्साध्यते कार्य तत्तस्मिन्‌ श्रेष्ठमुच्यते ।।
(उन (९।२९४) सात प्रकृतियों में से उन-उन कार्यो में उन-उन प्रकृतियों का विशिष्ट स्थान होता है, (अतएव) जो कार्य जिस प्रकृति से सिद्ध होता है उस कार्य में वह प्रकृति श्रेष्ठ मानी जाती है (इस प्रकार कार्य की अपेक्षा से समयानुसार सबकी श्रेष्ठता है)।
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