(उन (९।२९४) सात प्रकृतियों में से उन-उन कार्यो में उन-उन प्रकृतियों का विशिष्ट स्थान होता है, (अतएव) जो कार्य जिस प्रकृति से सिद्ध होता है उस कार्य में वह प्रकृति श्रेष्ठ मानी जाती है (इस प्रकार कार्य की अपेक्षा से समयानुसार सबकी श्रेष्ठता है)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।