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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 296
तप्ताङ्गस्येह राज्यस्य विष्टब्धस्य त्रिदण्डवत्‌ । अन्योन्यगुणवैशेष्याज्न किञ्चिदतिरिच्यते ।।
त्रिदण्ड (टिकटी-तिपाई) के समान परस्पर में सम्बद्ध सप्ताङ्ग (९।२९४) राज्य में उन अङ्गों को परस्पर में विलक्षण उपकारक होने से कोई भी अङ्ग एक दूसरे से बढ़कर नहीं है।
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