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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 295
सप्तानां प्रकृतीनां तु राज्यस्यासां यथाक्रमम्‌ । पूर्व पूर्वगुरुतरं जानीयाह््यसनं॑ महत्‌ ।।
राज्य की इन (९।२९४) सात प्रकृतियो में क्रमशः पूर्व-पूर्व की आपत्ति को राजा अधिक समझे।
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