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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 294
स्वाम्यमात्यौ पुरं राष्ट्र कोशदण्डौ सुहृत्तथा । तप्त प्रकृतयो होता: सप्ताङ्गं राज्यमुच्यते ।।
(१) स्वामी (राजा), (२) मन्त्री, (३) पुर (किला, परकोटा, खाई आदि से सुरक्षित राजधानी), (४) राज्य, (५) कोष, (६) दण्ड (चतुरङ्गिणी अर्थात्‌ हयदल, गजदल, रथदल और पैदल सेना) तथा (७) मित्र, ये सात राजप्रकृतियाँ हैं, इनसे युक्त "सप्तांग” (सात अङ्गोंवाला) राज्य कहलाता है।
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