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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 292
सर्वकण्टकपापिष्ठं हेमकारं तु पार्थिवः । प्रवर्तमानमन्याये छेदयेत्खण्डशः क्षुरैः ।।
सब कण्टकों (चोरी आदि पाप कर्म करने से राज्य में कण्टकतुल्य लोगों) में अधिक पापी सोनार यदि अन्याय करने (किसी प्रकार सोना-चाँदी आदि चुराने, या अच्छे धातु के साथ हीन धातु मिलाकर देने) वाला प्रमाणित हो जाय तो राजा उसके प्रत्येक शरीर को शस्त्रों से टुकड़े-टुकड़े कटवा डाले।
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