अबीजविक्रयी चैव बीजोत्क्रष्टा तथैव च ।
मर्यादाभेदकश्चैव विकृतं प्राप्नुयाद्वधम् ।।
जो मनुष्य नहीं जमने वाले बीज को जमने वाला कहकर बेचे तथा अच्छे बीज में दूषित बीज मिलाकर बेचे और (ग्राम-नगर आदि की) सीमा को नष्ट करे उसे राजा विकृत वध (हाथ, नाक,कान आदि अंगों को काटने) से दण्डित करे।
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