जो (स्त्री) मन, वचन तथा काय (शरीर) को संयत रखती हुई पति का उल्लङ्घन (अनादर या परपुरुष-सम्भोग) नहीं करती; वह (मर कर) पतिलोकों को पाती है तथा (जीती हुई) इस लोक में सज्जनों से पतिव्रता कही जाती है।
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