प्राकारस्य च भेत्तारं परिखाणां च पूरकम् ।
द्वाराणां चैव भङ्कारं क्षिप्रमेव प्रवासयेत् ।।
प्राकार (नगर या मकान का परकोटा अर्थात् चहारदिवारी) को तोड्ने वाले परिखा (खाई) को मिट्टी आदि से भरने वाले और द्वार (राजद्वार या नगरद्वार) को तोड़ने वाले मनुष्य को (राजा) शीघ्र ही देश से बाहर निकाल दे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।