मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 286
अदूषितानां द्रव्याणां दूषणे भेदने यथा । मणीनामपवेधे च दण्डः प्रथमसाहसः ।।
शुद्ध पदार्थ में अशुद्ध पदार्थ मिलाकर दूषित करने वाले, नहीं छेदने योग्य माणिक्य आदि को छेदने वाले और छेदने के योग्य मोती माणिक्य आदि को ठीक-ठीक योग्य स्थान पर नहीं छेदने वाले व्यक्ति को राजा प्रथम साहस (ढाई सौ पण ८।१३८) से दण्डित करे तथा जिसके उपर्युक्त पदार्थ नष्ट या दूषित हो गये हों उसे उन पदार्थों का मूल्य देकर वह (पदार्थ-दूषक मनुष्य) प्रसन्न करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें