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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 284
चिकित्सकानां सर्वेषां मिथ्याप्रचरतां दमः । अमानुषेषु प्रथमो मानुषेषु तु मध्यमः ।।
चिकित्सा करने वाला यदि अज्ञानवश पशुओं की ठीक चिकित्सा न करे तो उसे प्रथम साहस (२५० पण--८।१३८) तथा मनुष्यों की ठीक चिकित्सा न करे तो उसे मध्यम साहस (५०० पण--८।१३८) से राजा दण्डित करे।
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