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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 281
यस्तु पूर्वनिविष्टस्य तडागस्योदकं हरेत्‌ । आगमं वाप्यपां भिद्यात्स दाप्यः पूर्वसाहसम्‌ ।।
पुत्र आदि के लिए बनवाये गये तडाग आदि के पानी को जो कोई चुरावे अर्थात्‌ चोरीकर खेत आदि की सिंचाई करे अथवा उसके पानी जाने के मार्ग को बाँधकर आदि बाँधक रोके या नष्ट कर दे, उस व्यक्ति को राजा प्रथम साहस (८।१३८-२५० पण) से दण्डित करे।
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