सन्तान (को उत्पन्न करना), धर्मकृत्य (अग्निहोत्री यज्ञादि कार्य), शुश्रूषा (पति, सास-श्वसुरादि गुरुजनो की सेवा) श्रेष्ठ रति और पितरों का तथा अपना (सन्तानोत्पादनादि द्वारा) स्वर्ग - ये सब स्त्रियों के अधीन हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।