मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 28
अपत्यं धर्मकार्याणि श्रुशूषा रतिरुत्तमा । दाराधीनस्तथा स्वर्गः पितृणामात्मनश्च ह ।।
सन्तान (को उत्पन्न करना), धर्मकृत्य (अग्निहोत्री यज्ञादि कार्य), शुश्रूषा (पति, सास-श्वसुरादि गुरुजनो की सेवा) श्रेष्ठ रति और पितरों का तथा अपना (सन्तानोत्पादनादि द्वारा) स्वर्ग - ये सब स्त्रियों के अधीन हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें