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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 276
सन्धिं भित्त्वा तु ये चौर्य रात्रौ कुर्वन्ति तस्कराः । तेषां छित्वा नृपो हस्तौ तीक्ष्णे शूले निवेशयेत्‌ ।।
जो चोर रात में सेंध मारकर चोरी करते हैं, राजा उनके हाथों को कटवाकर तेज शूली पर चढ़ा दे।
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