ग्रामेष्वपि च ये केचिच्चौराणां भक्तदायकाः ।
भाण्डावकाशदाश्चैव सर्वास्तानपि घातयेत् ।।
गाँवों में भी जो काई चोरों के लिए भोजन, चोरी के उपयोगी बर्तन या वस्त्रादि देते हों; राजा उनका भी वध (या निरन्तर अथवा एकबार किये गये अपराध के अनुसार दण्डित) करे।
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