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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 268
भक्ष्यभोज्योपदेशैश्च ब्राह्मणानां च दर्शने: । शौर्यकर्मापदेशैश्च कुर्युस्तेषां समागमम्‌ ।।
वे गुप्तचर भक्ष्य-भोज्य पदार्थो का लोभ दिखाकर (तुम लोग मेरे यहाँ या अमुक स्थान पर आवो, हम सब एक साथ अमुक स्थान पर चढ़कर उत्तमोत्तम पदार्थ भोजन करेंगे इत्यादि प्रकार से खाने का लोभ देकर), ब्राह्मणों के दर्शन (अमुक स्थान में सब बातों के ज्ञाता एक सिद्धब्राह्मण रहते हैं, उनका दर्शनकर हम लोग अपना मनोरथ पूर्ण करें) इत्यादि कहने से साहस कर्म के कपट से (अमुक व्यक्ति के यहाँ एक बड़ा शूरवीर रहता है, वह अकेला ही अनेक आदमियों के साध्य कार्य को कर सकता है आदि कपट वचनों से), उन चोरों को एकत्रितकर राजा द्वारा नियुक्त शासन पुरुषों (सैनिक सिपाहियों) से उनका समागम करा दे अर्थात्‌ उन्हें गिरफ्तार करा दें।
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