(भृगुजी महर्षियों से कहते हैं कि) हे महाभाग (मुनियों)! सन्तानोत्पादन के लिए वस्त्राभूषण से आदर-सत्कार के योग्य घर की शोभारूपिणी ये स्त्रियाँ और लक्ष्मी (या-लक्ष्मियाँ = शोभाएँ) घरों में समान हैं (जिस प्रकार शोभा के बिना घर सुन्दर नहीं लगता उसी प्रकार स्त्री के बिना भी घर सुन्दर नहीं लगता, अतः श्री तथा स्त्री में कोई भेद नहीं।
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