(और) घूसखोर, डराकर धन लेने वाले ठग, जुआरी (९।२२३ में वर्णित द्यूत या समाह्वय से धन लेने वाले), धन या पुत्रादि के लाभ होने की असत्य बातें कहकर लोगों से धन लेने वाले, उत्तम (साधु, संन्यासी आदि का वेष धारण कर अपने दूषित कर्म को छिपाकर लोगों से धन लेने वाले, हस्तरेखा आदि को देखकर नहीं जानते हुए भी फल को बतलाकर धन लेने वाले।
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