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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 257
प्रकाशवञ्चकास्तेषां नानापण्योपजीविनः । प्रच्छन्नवञ्चकास्त्वेते ये स्तेनाटविकादयः ।।
उन दो प्रकार के चोरों में से मूल्य तथा तोल या नापने में लोगों के देखते-देखते सोना, कपड़ा आदि बेचते समय ठगनेवाले प्रथम (प्रत्यक्ष) चोर हैं तथा सेध डालकर या जङ्गल आदि में छिपकर रहते हुए दूसरों के धन को चुराने वाले द्वितीय (परोक्ष) चोर हैं।
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