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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 252
सम्यङ्निविष्टदेशस्तु कृतदुर्गश्च शास्त्रतः । कण्टकोद्धरणे नित्यमातिष्ठेद्यत्नमुत्तमम्‌ ।।
राजा पूर्व (७।६९) कथित सस्यादि-सम्पन्न देश का आश्रयकर वहाँ दुर्ग (७।७०) में वर्णित दुर्गों में से किसी एक प्रकार का दुर्ग-किला) बनवाकर कण्टकों (चोरों तथा साहस कर्म करनेवाले अर्थात्‌ आग लगाने वाले डाका डालने वाले आदि व्यक्तियों) को दूर करने में सर्वदा अच्छी तरह प्रयत्न करता रहे।
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