राजा पूर्व (७।६९) कथित सस्यादि-सम्पन्न देश का आश्रयकर वहाँ दुर्ग (७।७०) में वर्णित दुर्गों में से किसी एक प्रकार का दुर्ग-किला) बनवाकर कण्टकों (चोरों तथा साहस कर्म करनेवाले अर्थात् आग लगाने वाले डाका डालने वाले आदि व्यक्तियों) को दूर करने में सर्वदा अच्छी तरह प्रयत्न करता रहे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।