एषोदिता लोकयात्रा नित्यं स्त्रीपुंसयोः शुभा ।
प्रेत्येह च सुखोदर्कान्प्रजाधर्मान्निबोधत ।।
(महर्षि भृगुजी ऋषियों से कहते है कि मैंने) स्त्री-पुरुषों का सदा शुभ यह लोकाचार कहा, अब इस लोक में तथा परलोक में सुखदायक सन्तानों के धर्मो को (कहुँगा, उन्हें) आप लोग सुनें।
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