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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 248
ब्राह्मणान्बाधमानं तु कामादवरवर्णजम्‌ । हन्याच्चित्रैर्वघोपायैरुद्वेजनकरैर्नृपः ।।
जान-बूझकर (शरीर-पीड़ा तथा धन आदि चुराकर) ब्राह्मण को पीड़ित करने वाले शूद्र को राजा उद्रेगकारक विचित्र बधों (हाथ-पैर आदि को काटने) से मार डाले।
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