निष्पद्यन्ते च सस्यानि यथोप्तानि विशां पृथक् ।
बालाश्च न प्रमीयन्ते विकृतं न च जायते।।
वैश्यों (कृषकों) के द्वारा खेती में बोये गये बीज यथावत् पृथक्-पृथक् उत्पन्न होते हैं, (अकाल में) बालक नहीं मरते हैं और कोई प्राणी विकृत (किसी अङ्ग से हीन या विकारयुक्त) नहीं उत्पन्न होता है।
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