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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 242
इतरे कृतवन्तस्तु पापान्योतान्येकामतः । सर्वस्वहारमर्हन्ति कामतस्तु प्रवासनम्‌ ।।
अकामपूर्वक इन (९।२३४) अपराधों को करने वाले क्षत्रियों, वैश्यों व शुद्रों को सर्वस्व हरणकर दण्डित करे तथा कामपूर्वक अपराध करने वाले इनको वधरूप दण्ड दे।
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