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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 24
एताश्चान्याश्च लोकेऽ स्मिन्नकृष्टप्रसूतयः । उत्कर्ष योषितः प्राप्ताः स्वैः स्वैर्भर्तृगुणैः शुभैः ।।
इन (पूर्व श्लोकोक्त 'अक्षमाला' तथा “शारङ्गी') और दूसरी ('सत्यवती' आदि) नीच कुलोत्पन्न स्त्रियों ने अपने-अपने पति के शुभ गुणों से श्रेष्ठता को प्राप्त किया है।
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