मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 238
असम्भोज्या ह्यसंयाज्या असंपाठ्याविगर्हिताः । चरेयुः पृथिवीं दीनां सर्वधर्मबहिष्कृताः ।।
(ये चतुर्विध (९।२३५) महापातकी) असम्भोज्य (अन्न आदि खिलाने के अयोग्य), असंयाज्य (यज्ञादि सत्कर्म कराने के अयोग्य), असम्पाठ्य (पढ़ाने के अयोग्य) अविवाह्य (विवाह के अयोग्य), समस्त धर्म-(कार्या) से बहिष्कृत एवं दीन होकर पृथ्वी पर घूमा करें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें