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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 237
गुरुतल्पे भग: कार्यः सुरापाने सुराध्वजः । तस्करे श्वपदं कार्य ब्रह्महण्यशिराः पुमान्‌ ।।
गुरुपत्नी के साथ सम्भोग करने वाले (के ललाट) में भग का चिह्न, मद्य पीने वाले (के ललाट) में सुरापात्र का चिह्न, ब्राह्मण के सुवर्ण को चुराने वाले (के ललाट) में कुत्ते के पैर का चिह्न तथा ब्राह्मण की हत्या करने वाले (के ललाट) में शिरकटे मनुष्य को चिह्न (तपाये हुए लोहे से) करा देवे।
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