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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 236
चतुर्णामपि चैतेषां प्रायश्चत्तमकुर्वताम्‌ । शारीरं धनसंयुक्तं दण्डं धर्म्य प्रकल्पयेत्‌ ।।
राजा प्रायश्चित नहीं करने वाले इन चारों प्रकार के महापातकियों को शारीरिक तथा अपराधानुसार आर्थिक दण्ड से धर्मानुसार (आगे (९।२३७-२४०) कहे गये दण्ड से) दण्डित करे।
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