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मनुस्मृति • अध्याय 9 • श्लोक 235
ब्रह्हा च सुरापश्च तस्करो गुरुतल्पगः । एते सर्वे पृथक्‌ ज्ञेया महापातकिनो नराः ।।
(१) ब्राह्मण की हत्या करनेवाला, (२) मद्य पीनेवाला ('पेष्टी' मद्य को पीने वाला) द्विज (ब्राह्मण, क्षत्रिय तथा वैश्य) और 'पेष्टी-माध्वी-गोडी' (क्रमशः आटा, महुआ तथा गुड़ से बने हुए) मद्य को पीने वाला ब्राह्मण, (३) (ब्राह्मण के सुवर्ण को) चुराने वाला एवं (४) गुरुपत्नी के साथ सम्भोग करने वाला और पृथक्‌-पृथक्‌ कर्म करने वाले इन सबको महापातकी जानना चाहिये।
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