अमात्याः प्राइविवाको वा यत्कुर्युः कार्यमन्यथा ।
तत्स्वयं नृपतिः कुर्यात्तं सहस्रं च दण्डयेत् ।।
मन्त्री या न्यायाधीश (जज आदि राजाधिकारी) जिस कार्य को ठीक (न्यायपूर्वक) नहीं किये हों, उस कार्य को राजा स्वयं करे और उन्हें सहस्र पण (८।१३६) से दण्डित करे।
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